"भारत के पुनरुत्थान "
"भारत को सोने की चिड़िया कैसे बनायेगे!!"
हम सब को सत भक्ति करनी होगी।
"कलयुग में सत्ययुग "
सनातन काल से ही हर मानव को भक्ती करता आ रहा है। लेकिन वह बहुत ही पुण्य कर्मी होता है जिस के कारण धनी व सम्रद्ध होते है।उस समय सब लोग सच बोलते है।
सत्ययुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता। शांति होती है । पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नहीं होती थी।, रोग रहित होते थे। सर्व मानव भक्ति करते ,और परमात्मा से डरने वाले होते हैं क्योंकि वेआध्यात्मिक ज्ञान के सर्व कर्मों सेश परिचित होते है। मन , कर्म वचन सेषकिसी को पीङा नहीं देते तथा दुराचारी नहीं होते।
जति सति, स्त्री पुरूष होते हैं । वृक्षों खी अधिकता होती है। सर्व मनुष्य वेदों के आधार से भक्ति करते थे। वे भक्ति में गहरी रूची रखते थे।
वर्तमान की स्थिति
वर्तमान में कलयुग है । इसमें अधर्म बढ़ चुका है। कलयुग में मानव की भक्ति के प्रति आस्था कम हो जाती है और भक्ति करते ही नहीं । यदि करते हैं तो शास्त्र विधि त्याग कर मनमानी भक्ति करते हैं । जो श्रीमद्भागवत गीता अधयाय 16 श्लोक 23-24 में वर्जित हैं ।जिस कारण से परमात्मा से जो लाभ वांछित होता है वह प्राप्त नहीं होता । इसलिए अधिकतर मनुष्य नास्तिक हो जाते हैं ।धनी बनने के लिए रिश्वत, चोरी, डाके डालने को माध्यम बनाते हैं ।परन्तु यह विधि धन लाभ की न होने कारण परमात्मा के दोषी हो जाते हैं । तथा प्राकृतिक कष्टों को झेलते हैं । परमेश्वर के विधान को मानव भूल जाता हैकि किस्मत से अधिक प्राप्त नहीं हो सकता। यदि अन्य अवैध विधि से धन प्राप्त कर लिया तो वह रहेगा नहीं ।
समाधान
हम सच्चे सतगुरू की चरण में जाना चाहिए । जिसे हमारा मार्ग दर्शन कर सके । सत भक्ति का विधि ज्ञान दे। जिस ज्ञान से सर्व प्रकार की बुराइयों को छुट जाती है। कोई भी झूठ नहीं बोलते है।चोरी ,डाकेती नहीं करते , रिश्वत नहीं लेते है।
वैसा ही वातावरण ही होजाता जैसा सत्युग में होता है एक दम सुन्दर व सुगन्ध शील होता है।सत्ययुग में कोई भी
हम सब सच्चे सतगुरू की चरण में जाना चाहिए ।उस के लिए हमारी वेबसाइट पर पुस्तक पढ़े जीने की राह 👇👇👇👇👇
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