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Showing posts from May, 2020

"भारत के पुनरुत्थान "

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 "भारत को सोने  की चिड़िया कैसे  बनायेगे!!" हम सब को सत भक्ति  करनी होगी।                         "कलयुग में सत्ययुग " सनातन  काल से ही हर मानव को भक्ती करता  आ रहा  है। लेकिन वह बहुत  ही पुण्य कर्मी होता है जिस के कारण धनी व सम्रद्ध  होते है।उस समय सब लोग सच बोलते है। सत्ययुग उस समय को  कहते हैं  जिस युग में  अधर्म  नहीं  होता। शांति होती है । पिता से पहले  पुत्र की मृत्यु नहीं  होती थी।, रोग रहित  होते थे। सर्व मानव भक्ति  करते ,और परमात्मा से  डरने वाले होते  हैं क्योंकि  वेआध्यात्मिक ज्ञान  के सर्व कर्मों  सेश परिचित  होते है। मन , कर्म  वचन सेषकिसी को पीङा  नहीं  देते तथा दुराचारी  नहीं  होते। जति सति, स्त्री पुरूष  होते हैं । वृक्षों  खी अधिकता होती है। सर्व  मनुष्य  वेदों  के  आधार  से भक्ति  करते  थे। वे भक्ति  में   ग...

"बिमारियों के कारण ओर उनका स्थायी आध्यात्मिक ईलाज "

रोग  मनुष्य को उसके  पिछले कर्मों दण्ड  के आधार  पर होती वर्तमान  में जो मनुष्य सुखी है उनको किसी भी प्रकार  की कोई पीङा  नहीं है  वह पिछले  जन्मों  के अच्छे पुण्यकर्मी आत्मा  होती है।उनके पुण्य  अच्छे  होने के कारण  उनको कोई भी दुख नहीं  है  और वर्तमान  में कुछ ऐसे लोग हैं  जो कि कही  प्रकार  की बिमारियों   से ग्रसित  हैं  वो बहुत  काफी इलाज  भी करा लिया फिर भी ठीक  नहीं  होती  है  ठीक  इसलिए  नहीं  होते है क्योंकि  उनके अब पुण्य  खत्म  हो गये है  और  उन्होंने  जो पिछले जन्म  में  कर्म  किए थे पाप किए थे उन  पापों  का दंड उस  व्यक्ति  को अब  मिल रहा है इसलिए  उस पर  अब  कोई भी दवाई  काम  नहीँ  करती अगर  हम आध्यात्मिक  मार्ग  से  देखें  तो इस  लोक  का विधान  है की जो व्यक्ति  जैसे क...

।।नकली गुरू को त्याग देना पाप नहीं है ।।

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।।नकली गुरू को त्याग  देना पाप  नहीं ।। यह सारी सच्चाई समझ कर वह पुण्य  आत्मा  काफी प्रभावित  हुआ तथा कहा कि आपके  द्वारा  बताया  गया ज्ञान सही है और हमारी साधना ठीक  नहीं  है ।वह लगातार  तीन बार  सतसंग सुनने आया तथा  कहा कि  दिल तो कहता है कि मैं भी नाम ले लूं  लेकिन  मेरे सामने एक दीवार  खङी है। 1.एक तो कहते हैं  गुरू नहीं  बदलना  चाहिए,  पाप होता है । 2.दूसरे मैंने लगभग 400-500(चार  सौ-पांच सौ ) भक्तों  को इसी पंथ के संत से उपदेश  दिलवा  रखा  हैं  वे  मुझे  अपना सरदार  तथा  पूर्ण  ज्ञान  युक्त  समझते हैं । अब मुझे लगती है कि वे क्या  कहेंगें? अर्थात् मुझे धिक्कारेंगे।  मैंने(संत रामपाल  दास ने) उस भक्त  को बताया:- कबीर  साहिब  व सर्व संत  यही कहते  हैं  कि झूठे  गुरू को तुरंत  त्याग  दे।  प्रमाण  के लिए कबीर  पंथी शब्दावली  पृष्ठ ...