"बिमारियों के कारण ओर उनका स्थायी आध्यात्मिक ईलाज "
रोग मनुष्य को उसके पिछले कर्मों दण्ड के आधार पर होती
वर्तमान में जो मनुष्य सुखी है उनको किसी भी प्रकार की कोई पीङा नहीं है वह पिछले जन्मों के अच्छे पुण्यकर्मी आत्मा होती है।उनके पुण्य अच्छे होने के कारण उनको कोई भी दुख नहीं है और वर्तमान में कुछ ऐसे लोग हैं जो कि कही प्रकार की बिमारियों से ग्रसित हैं वो बहुत काफी इलाज भी करा लिया फिर भी ठीक नहीं होती है ठीक इसलिए नहीं होते है क्योंकि उनके अब पुण्य खत्म हो गये है और उन्होंने जो पिछले जन्म में कर्म किए थे पाप किए थे उन पापों का दंड उस व्यक्ति को अब मिल रहा है इसलिए उस पर अब कोई भी दवाई काम नहीँ करती अगर हम आध्यात्मिक मार्ग से देखें तो इस लोक का विधान है की जो व्यक्ति जैसे कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा इसलिए अधिकतर व्यक्ति दुखी रहते हैं उनको लाइलाज बिमारी लग जाती है वह कभी ठीक नहीं होती हैं अंत में मृत्यु को प्राप्त होते हैं ।
✴"लाइलाज बीमारियों का निवारण कैसे होगा
आखिर लाइलाज बीमारियों का इलाज सत भक्ति करने से होगा क्योंकि अगर हम सत भक्ति करेगे तो हमारे पाप कर्म नष्ट हो जाएंगे और फिर हम सुखी और स्वस्थ हो जाएंगे सत भक्ति इस पूरे संसार में केवल एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पास है और उनके जितने भी शिष्य है उन सब को आध्यात्मिक लाभ हो रहा है ।संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में आज वर्तमान समय में कोरोना जैसी भयानक बीमरी पूरे विश्व में फैल चुकी है जिससे लाखों लोग मर चुके इसका अभी तक कोई भी इलाज नहीं अगर पूरा संसार सत भक्ति करने लग जाएगा तो कोरोना वायरस बीमारी से भी ठीक हो जाएंगे क्योंकि सत भक्ति करने से संपूर्ण पापों का नाश हो जाता है फिर व्यक्ति सुखी हो जाता है।
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